DEPARTMENT OF HINDI

श्यामलाल पाण्डवीय शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अपने आरम्भिक रूप में शासकीय विज्ञान महाविद्यालय, ग्वालियर की एक शाखा के रूप में सन् 1967-69 की अवधि में प्रारंभ हुआ । आगे चलकर ग्वालियर के उपनगर मुरार की जनता की मांग पर शासन के निर्देषानुसार इसे 1 जुलाई 1970 को शासकीय बालक महाविद्यालय मुरार के रूप में मान्यता प्राप्त हुई और विज्ञान महाविद्यालय से इसे पृथक कर बारादरी में स्वतंत्र व्यक्तित्व प्रदान किया गया । विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शासन ने इस महाविद्यालय को एक अलग भवन प्रदान किया और वर्ष 1982-83 में शसकीय बालक महाविद्यालय बारादरी से स्थानांतरित होकर मुरार में प्रसिद्ध समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी स्व0 बाबू श्यामलाल पाण्डवीय जी की स्मृति में इस महाविद्यालय का नाम श्यामलाल पाण्डवीय महाविद्यालय मुरार रखा दिया गया । तब से यह महाविद्यालय निरन्तर विकास की सीढ़िया चढ़ता हुआ अपनी यौैवनावस्था पर पहुॅंच चुका है ।

महाविद्यालय में सेचालित विभिन्न पाठ्यक्र्रमों में हिन्दी एक अनिवार्य विषय होने के कारण यह महाविद्यालय की शैषवास्था से ही इसकी साथ जुड़ा है। एक तरह से कहा जाये तो ‘हिन्दी विभाग’ का इतिहास महाविद्यालय के इतिहास से ही सम्बद्ध है । इस बात से ही हिन्दी विभाग की उपयोगिता सहज सिद्ध है । इस बात से ही हिन्दी विभाग की उपयोगिता सहज सिद्ध है । हिन्दी विषय की उपयोगिता को देखते हुए शासन ने विद्यार्थियों और उनके पालकों की मांग पर वर्ष 2003-04 में स्व-वित्तीय योजना के तहत हिन्दी विभाग में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई का निर्देष दिया । शासन के निर्देषानुसार वर्ष 2004-05 में इस महाविद्यालय के हिन्दी विभाग में स्नातकोत्तर उत्तरार्ध की कक्षा भी प्रारम्भ हो गई ।

 
सं.क्र. नाम पद
1. डाॅ. अनुभा पांडे सहा. प्राध्यापक
2. डाॅ. आशा कुमारी सहा. प्राध्यापक